जीत के जश्न में 2 मिनट का मौन भी भूले प्रधानमंत्री: आगा यूनुस

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सूरत मे 22 छात्रों को ट्रांसफारमर मे लगी आग के चलते जिंदा जलकर जान देना पडा, इस हृदयविदारक घटना ने पूरे देश की आंखे नम कर दी। सूरत शहर जिसको गुजरात माडल का प्रतीक बनाकर 2014 मे चुनाव लड़ा गया । वहां कामर्शियल बिल्डिंग बिना मानको व सुरक्षाकवच के संचालित थी। यह बातें कांग्रेस के महानगर महासचिव आगा यूनुस ने कही। उन्होंने कहा कि नीचे से ऊपर तक चली आग और बिलडिंग के ऊपरी सतह तक फैली आग और वहां की जनता जिसको उनको बचाने के लिए सर्वोच्च देना चाहिए था वो स्वार्थी लोग मोबाइल पर विडियो बनाकर पूरी मानवता को आग लगा रहे थे। इसी में एक शायद समाजसेवी मां बाप का बेटा होगा, जिसका नाम ‘केतन’ अपने आप में मानवता की मिसाल बन गया। ऐसे योद्धा व समाजसेवी को मेरा दिली सलाम। ऐसे समाजसेवी शायद आठ दस भी उस मूकदर्शक व स्वार्थी भीड मे होते तो शायद इतनी बडी तादाद में बच्चो के जीवन को लीलने का काम नही होता। सूरत शहर जो आर्थिक शहर है। जहां से शायद सरकार का खजाना टैक्स से खूब भरता होगा, वहां दो से पांच मिनट की दूरी पर बचाव तंत्र (फायर बिग्रेड) मीडिया रिपोर्ट व चशमदीदो के मुताबिक करीब 45 मिंनट मे पहुंचता है। वो भी पूरे संसाधनों के बिना, 20 से 25 मीटर की सीढी तक नहीं।शहरों के अंदर पांच मंजिला इमारत होना मामूली बात है, तो क्या जनता से इतना भारी टैक्स जमा करने वाली सरकार उनकी हिफाजत के लिए संसाधन तक नही रखती। और देश के होनहार युवाओं सबके सामने मर रहे होते। असल मे सरकार चुनते समय देश के मुद्दे हमने बदल दिए हैं, इधर इतना बडा गम देश मे, और उधर जीत का जश्न व सरकार बनाने मे सरकार लग चुकी है। कल मा. पीएम के 17 वी लोकसभा के संसदीय नेता के गठन मे, जहां इतनी जानों का मातम देश के समझदार लोग मना रहे हो, वहां संसद मे ठहाके व तालियों के बीच शायद देश के सांसद दो मिनट मौन रखना भूल गए होगें। मा. पीएम अपने गृह प्रदेश की इतने बडे गम को कैसे भूल गए, समझ नही आया, शायद अब सब सिस्टम की जिम्मेदारी तय कर देने मे लग जाएंगे। पर सिस्टम तो सरकार से चलता है। बडा सवाल है कि इतने बडे अग्नि नरसंहार की जिम्मेदारी कौन लेगा । पीडि़त परिवार के साथ हमारी संवेदनाएं हमेशा रहेगी, मलाल इस बात का रहेगा कि काश हम भी वहां होते और कुछ बच्चो को बचा पाते।