देश मे लगभग 24 लाख रिक्त पद खाली, व एक साल मे 1.10 करोड लोगो की गई नौकरी : आगा युनुस………

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देश मे बढती बेरोजगारी आज देश के लिए प्रमुख चिंता का विषय है, हमारे देश के युवा जाएं तो जाएं कहां ? CMIE की रिपोर्ट के मुताबिक 31 दिसंबर 2018 के बेरोजगारी दर 7.38% के मुकाबले 12 जनवरी 2019 मे, बढकर 7.64% हे गई है । एक साल मे ही 1 करोड 10 लाख लोगो की नौकरियां चली गई। नई नौकरियां पर जैसे मानो पूरी तरह विफल हो चुकी है ये सरकार।लगभग 24 लाख रिक्त पद पडे हुए है, दूसरी तरफ देश मे जिन लोगों के पास काम था, अनुमानित है कि नोटबंदी और GST के कारण 50 लाख से ऊपर लोग सडको पर आ गए। यह बातें कांग्रेस के महानगर महासचिव आगा यूनुस ने कही। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्यो के रिक्त पदो को भी सरकार नही भर रही है, जिससे पूरे देश के युवा बेहाल है । जबकि इस सरकार ने 2014 मे सत्ता में आने से पूर्व देश के युवाओ से वादा किया था कि सालाना दो करोड लोगो को रोजगार देंगें। 121 करोड़ की आबादी वाले ऐसे देश में जहां 31 प्रतिशत जनसंख्या 20 से 44 साल के उम्र की है, वैसे भारत में बड़ी तादाद में महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर भर्तियां नहीं हो रहीं। विभिन्न विभागों के लिहाज से खाली पड़े पदों की तादाद 20 से 50 प्रतिशत तक है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने छह केंद्रीय मंत्रालयों रक्षा, मानव संसाधन, स्वास्थ्य, गृह, वित्त और कानून मंत्रालय के आंकड़े हासिल किए। इन आंकड़ों के मुताबिक, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रिक्त पड़े पदों की संख्या 6 से 10 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एक्सपर्ट्स इसकी वजह रिटायरमेंट और प्रमोशन को बताते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि हमारा देश जनसांख्यिकीय बढ़त का लाभ महत्वपूर्ण सेवाओं को मजबूत करने में क्यों नहीं ले पा रहा है? एक्सपर्ट्स इसके लिए कई बातों की ओर इशारा कर रहे हैं…

शिक्षा

मानव संसाधन मंत्राय (एचआरडी) से मिले आंकड़े बताते हैं कि देशभर में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के 10 लाख शिक्षकों की जरूरत है। आईआईटी, एनआईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में ही करीब 6,000 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 6,000 पद खाली हैं। इंजिनियरिंग कॉलेजों में अंडरग्रैजुएट कोर्सेज की फैकल्टी के लिए स्वीकृत 4.2 लाख पदों का 29 प्रतिशत खाली है। आईआईआईटी बेंगुलुरू के फाउंडर-डायरेक्टर प्रफेसर एस सदगोपन ने कहा कि ज्यादातर रिक्तियां शहरी केंद्रों से दूर स्थित संस्थानों में हैं जो अक्सर अपर्याप्त सुविधाओं के कारण उत्साही प्रफेसरों का मनोबल तोड़ने वाला होता है। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ अच्छा वेतन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन जगहों को शिक्षकों के रहने लायक भी बनाने की जरूरत है।’

स्वास्थ्य
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अलॉपैथिक डॉक्टर और मरीज का अनुपात 1:1,560 है। करीब 7 लाख आयुष डॉक्टरों को भी जोड़ लें तो यह अनुपात 1:707 ही होगा जो आदर्श स्थिति से बहुत दूर है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों के पद सबसे ज्यादा खाली हैं। बुनियादी जरूरतों के अभाव के कारण डॉक्टर दूर-दराज इलाकों में जाना नहीं चाहते। होसमत हॉस्पिटल, बेंगलुरु के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजीत बेनेडिक्ट रयान ने कहा, ‘हमें ग्रामीण इलाकों में और कॉलेजों की जरूरत है।’

पुलिस, कानून प्रवर्तन एजेंसियां
आपको सिर्फ यह पता होगा कि देश में पुलिस बल बहुत दबाव में काम कर रहा है क्योंकि यहां भारी संख्या में पद खाली पड़े हैं। यह आंकड़ा करीब-करीब 24 प्रतिशत है। लेकिन, चौंकानेवाली बात यह है कि सीबीआई जैसी देश की महत्वपूर्ण एवं प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के भी 22 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वहीं, ईडी तो सिर्फ 36 प्रतिशत मैनपावर के दम पर काम कर रहा है। पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लई ने टीओआई को बताया, ‘टॉप लेवल के अधिकारियों को समय पर भर्ती के लिए जोर लगाना चाहिए…अगर प्रभाव पुलिस व्यवस्था और अपराध से निपटने की बात हो तो। लेकिन, दुर्भाग्य से सरकारें इसमें दिलचस्पी लेती नहीं दिखतीं और अधिकारियों को सिर्फ अपने करियर की चिंता रहती है।’

रक्षा
आयुध कारखानों में 41 प्रतिशत तकनीकी पद और 44 प्रतिश गैर-तकनीकी पद खाली पड़े हैं। इसका असर उत्पादन पर और शोध एवं अनुसंधान (आरऐंडडी) पर पड़ रहा है। सशस्त्र बलों के तीनों विंग्स में 55,000 पद रिक्त हैं। रक्षा विशेषज्ञ कॉमडोर (रिटारयर्ड) जी जे सिंह ने कहा कि दूसरे सेक्टर्स में मौके यहां रिक्तियों की वजह हो सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें यह भी देखना होगा कि हम अपने सैनिकों और दिग्गजों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। अगर उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होगा तो दूसरों को जॉइन करने की प्रेरणा नहीं मिलेगी।

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