8 लाख यानी 2191 रुपए रोज कमाने वाला व्यक्ति गरीब कैसे : आगा यूनुस

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2014 चुनाव से पहले किएउ चुनावी वादों की तरह जैसे 15 लाख रू, दो करोड युवाओ को सालाना रोजगार ,किसानो को उपज पर लागत का 1.5 गुना , इन सब पर विफल भाजपा सरकार ने अब 2019 चुनावो के पहले सर्वणो में आर्थिक रूप से कमजोर लोंगों को मात्र 10% आरछण देने का चुनावी वादा वो भी अपने अंतिम पल यानि पौने पांच साल पर व संसद सत्र समाप्ति से एक दिन पहले व लोकसभा चुनाव से लगभग 100 दिन पहले किया है, जो पहले के जुमलो की तरह मात्र चुनावी छलावा लगता है । यह बातें अलीगढ़ कोंग्रेस के महानगर महासचिव आगा यूनुस ने कही। उन्होंने कहा कि हद हो गई कि इस 10% आरक्षण मे नाम तो आर्थिक रूप से गरीबो का रखकर और शामिल मध्यमवर्गीय को कर लिया गया है। जो आर्थिक मानक 8 लाख रू सालाना रखा गया है वो अपने आप मे दिखाता है कि नाम गरीबो का, और शामिल लगभग कुछ अमीरो को छोड कर सभी सर्वणो को कर लिया गया है। ये गरीबों के हक में सेंधमारी नही तो क्या है ? एक तरफ सरकार किसको गरीब मानती है, इसको समझने की आवश्यकता है । जब देश मे करीब 32% लोग बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) है। और सरकार इनको शहरी गरीब 32रू रोजाना व 26 रू ग्रामीण खर्च करने वाले को निर्धनता रेखा यानि बीपीएल मे मानती है, बावजूद इसके 8 लाख रू तक सालाना कमाने वाले को भी इस 10% आरक्षण मे शामिल किए जा रहे है । सरकार गरीबी का मानक एक तरफ रोजाना 26 रुपए ग्रामीण व 32 रुपए शहरी खर्च करने वाले को रखती है, और दूसरी तरफ इस आरक्षण मे आर्थिक मानक 8 लाख रुपए सालाना यानि 2191 रुपए रोजाना कमाने वाले को शामिल कर लिया जाना अपने आपमें सवाल खडे करता है। तो क्या आर्थिक मानक को नही बदलना चाहिए। हमारे देश मे गरीबों की आर्थिक रेखा क्या है ? क्या कहते हैं BPL के मानक?उसके पास कच्चा मकान हो या वह बेघर हो। प्रति व्यक्ति के पास 4 जोड़ी से अधिक वस्त्र न हो। अनियमित जलापूर्ति सहित सार्वजनिक शौचालय का उपयोगकर्ता हो। टीवी, पंखा, रसोई गैस, कुकर, रेडियो आदि में से कोई एक हो या कुछ नहीं हो। उसकी शिक्षा प्राथमिक तक ही हो। व्यवसाय में मजदूरी हो। परिवार का कोई व्यक्ति उच्च शिक्षित या व्यावसायिक न हो। फोन नहीं हो। स्वयंचलित वाहन न हो। एक से अधिक गैस सिलेंडर न हो।

रंगराजन समिति का प्रस्ताव लंबित
केंद्र स्तर पर बीते अनेक वर्षों से गरीबी रेखा के मानकों का निर्धारण करने के लिए विविध समितियां बनाई गईं। उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट पर अब तक अमल नहीं किया जा सका। तेंडुलकर समिति द्वारा पेश प्रस्ताव जब विवादों में घिरा तो रंगराजन समिति का गठन किया गया था। इसकी सिफारिशें जहां लागू नहीं हो पाईं, वहीं देश में BPL का सही आंकड़ा भी ज्ञात नहीं हो पाया। शहर में 32 एवं ग्रामीण क्षेत्र में 26 रुपए से अधिक उत्पन्न वाले व्यक्ति को गरीब मानने के लिए सरकार तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार की योजनाओं को जरूरतमंदों तक सही लाभ पहुंचाने में प्रशासन को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले 1991 मे नरसिंम्हा राव ने 10% आरछण सर्वण गरीबो को दिया था, पर 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।

 

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