सड़क पर जिंदगी की तलाश करने वाले बच्चों को पढ़ाने की हो रही कवायद

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अलीगढ में झुग्गी-झोपड़ी में रहकर सड़क किनारे पडे कूडे के ढेर में अपनी जिन्दगी की तलाश करने वाले बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए उन्हें पढाने की कवायद एएमयू के बेगम सुल्तान जहां हॉल में शुरू की गई है। यह कार्य हॉल में रहने वाले छात्रों ने अपने कंधो पर उठाया। इसके लिए छात्र बच्चों की किताब-कॉपी से लेकर खाने-पीने तक की व्यवथा अपने स्तर से कर रहे है। इस कार्य में हॉल के प्रवोस्ट ने छात्रों को हर संभव मदद दी है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहें है और इन बच्चों ने स्कूलों में प्रवेश भी लिया है।
एएमयू के हॉल बेगम सुल्तान जहां में झुग्गी-झोपडी में रहने वाले गरीब बच्चों को हॉल में रहने वाले छा़त्रों ने पढाने का संकल्प लिया है। इसके लिए बच्चों को बाकायदा क्लास लगाकर पढाया जाता है। ये अलग बात है कि छात्रों को पढाने के लिए हॉल में रहने वाले छात्राओं में जिसके पास समय होता है। मुजफ्फरनगर की रहने वाली पीएचडी की छात्रा सोफिया ने बताया कि जब कभी इन बच्चों को देखते थे इनके बचपन को इस तरह से सड़कों पर गुजारता देख दिल में दर्द उठता था। इस लिए इन बच्चों को पढाने का बीडा उठाया और इसके लिए हॉल में एक निश्चित समय में बच्चों को पढाना शुरू किया। शुरूआत 2-4 बच्चों से करने के बाद इनकी संख्या बढती गई। बच्चों की संख्या बढी तो उनके साथ भी अन्य छात्राएं जुडती गई और 15-16 छात्राएं उनके साथ आ गई। उन्होंने बताया कि छात्राएं इन्हें पढाने के साथ अन्य तरह से भी मदद कर देती हैं। इस समय करीब 60 बच्चों को बेगम सुल्तानजहां हॉल में शिक्षा दी जा रही है। इस कार्य में छात्राओं को हॉल की प्रवोस्ट प्रो. असमा अली ने भी हर संभव मदद दी है। प्रो. असमा अली छात्राएं उनसे किसी किताब कॉपी या अन्य तरह से सहयोग के लिए कहती हैं तो वह उन्हें हर संभव मदद करती है। इन बच्चों को पढाने में अन्य छात्राओं में ऊजमा लतीफ, साजिया, अदिजा व अन्य छात्राएं हैं जो बच्चों को पढाने के साथ-साथ किताब-कॉपी कपड़े तक में मदद करती हैं। यहां पढने वाले बच्चों ने स्कूल में भी प्रवेश ले लिए हैं। लेकिन इन बच्चों के माता-पिता की स्तिथि ऐसी नहीं कि वह इन बच्चों की पढाई करा सकें। तो इसके लिए छात्राओं ने उन बच्चों को पढाई का खर्च उठाने का जिम्मा ले लिया।
हॉल की प्रवोस्ट प्रो. असमा अली ने यह भी बताया कि उनका हॉल आवासीय है, जिसके कारण हॉल में कई छात्र हैं। डाइविंग हॉल डाइनिंग हॉल में भोजन करते समय अक्सर खाना बर्बाद हो जाता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपनी बचत को बर्बाद न करें। इसे इन बच्चों को वितरित करें। इस कदम के प्रभाव में भी बच्चों में वृद्धि हुई,

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