अंजना ओम कश्यप ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, बोली….

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मोदी सरकार को 4 साल बीत चुके हैं, कुछ ही महीनों में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। घोषणा पत्र का एक भी वादा पूरा हुआ नहीं है। ऐसे में सरकार मुद्दों को भटकाना चाहती है। सत्ताधारी बीजेपी चाहती है कि विकास, रोजगार, महंगाई, महिला सुरक्षा पर बात ना हो। इस काम में मोदी सरकार का साथ मीडिया दे रहा है।

देखना होगा कि जिन मीडिया घरानों को गोदी मीडिया कहा जाता है और जिन पत्रकारों को गोदी या चाटुकार पत्रकार कहा जाता है, इन लोगों ने जैसे पत्रकारिता के नाम पर मोदी भक्ति ही अपने जन्म का लक्ष्य बना लिया है। यानी टीवी चैनलों पर रोहित सरदाना और अंजना ओम कश्यप जैसे एंकर मोदी सरकार की गलतियों को विपक्षी नेताओं की गलती बताकर उनपर निशाना साध रहे हैं!

ये टीवी एंकर हिन्दू-मुसलमान, गाय-गोबर, राम मंदिर जेएनयू, कश्मीर पर बहस तो करवा रहे हैं। लेकिन, जो संस्थाएं आरएसएस और बीजेपी से जुडी हुई हैं उनपर ये खामोश हैं।

आरएसएस से जुड़े सनातन संस्था के मुंबई कार्यालय से विस्फोटक बम मिले! मगर इसपर पूरा मीडिया चुप रहा। यही बम किसी मुसलमान और दलित के कार्यालय से मिलते तो अंजना ओम कश्यप इसपर क्या करतीं?

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इसी सनातन संस्था पर आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगा है। भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाने के नाम पर सनातन संस्था ना केवल ‘सेकुलरिज्म’ को नुकसान पहुंचाती है बल्कि संविधान के कई और प्रावधानों के खिलाफ भी काम करती है।
28 अगस्त को महाराष्ट्र पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों से भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। ये सामाजिक कार्यकर्ता दशकों से लोगों की सेवा करते आए हैं। अब इनकी गिरफ्तारी पर जो लोग इनके बचाव में आ रहे हैं उनमें कई लेखक, विद्वान और राजनेता हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी इसके बचाव में हैं।
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लेकिन अंजना ओम कश्यप आज की सबसे बड़ी खबर ‘नोटबंदी’ से वापस आये नोटों को छोड़कर राहुल गाँधी को निशाना बनाते हुए ‘संघ पर वार, नक्सलियों पर ऐतबार’ कार्यक्रम कर रही हैं।

लेकिन इस कार्यक्रम में अंजना का ‘संघ प्रेम’ ज्यादा दिखाई दे रहा है। बल्कि अंजना कश्यप का संघ और मोदी प्रेम उनके सभी कार्यक्रमों में दिखता है।

वहीं ज़ी न्यूज़ राहुल गाँधी को निशाना बनाते हुए ‘सियासत के लिए शहरी नक्सली कुबूल’ नाम से कार्यक्रम चला कर अपने ट्विटर हैंडल से लिख रहा है- सियासत के लिए ‘शहरी नक्सली’ कुबूल? नक्सलियों पर नकेल से राहुल परेशान क्यों? नक्सलियों से सहानुभूति जताकर मिलेगी 2019 में सत्ता? ‘नक्सल प्रेम’ सियासत का नया ट्रेंड?

ये बात सच है कि नक्सली के नाम पर देशभर से जो गिरफ्तारियां हुई हैं उससे सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेकी जाएँगी। इसका सीधे फाएदा बीजेपी को होगा। बीजेपी को फाएदा पहुँचाने के लिए मीडिया चैनल के साथ गोदी पत्रकार भी जुट गए हैं।

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