शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमेन के खिलाफ इराक से फतवा जारी, ये हैं मामला….

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शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी वक्फ संपत्ति को राम मंदिर या दूसरे किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए नहीं दे सकते। इस संबंध में शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु इराक के आयतुल्लाह अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी ने फतवा दिया है। वसीम रिजवी के वक्फ संपत्ति को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए दिए जाने संबंधी प्रस्ताव पर यह फतवा मांगा गया था।

दरअसल वसीम रिजवी ने वक्फ संपत्ति को राम मंदिर निर्माण के लिए दिए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव दिया था। इसके बाद कानपुर के शिया बुद्धिजीवी और मैनेजमेंट गुरु डॉ. मजहर अब्बास नकवी ने इराक स्थित आका सिस्तानी के ऑफिस में ई-मेल भेजकर फतवा मांगा था। इसके जवाब में आका सिस्तानी के कार्यालय के ‘इस्तिफ्ता सेक्शन’ से एक शब्द का जवाब आया है। जवाब में ‘लायजोज’ लिखा गया है। अरबी के इस शब्द का मतलब होता है कि ‘इसकी अनुमति नहीं है।’

सोमवार को डॉ. नकवी ने पत्रकारों को बताया कि आका सिस्तानी के जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि शिया मुसलमान की हैसियत से वसीम रिजवी वक्फ संपत्ति मंदिर निर्माण या किसी अन्य प्रयोग के लिए दान नहीं कर सकते। उन्हें अपनी एप्लीकेशन अब ‘नॉट प्रेस’ कर देनी चाहिए और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करते हुए बयानबाजी से बचना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें शिया मुसलमान नहीं माना जाएगा। डॉ. नकवी ने कहा कि रिजवी अब याचिका वापस लें या फिर धर्म परिवर्तन कर लें।

आका सिस्तानी के फैसले का सुन्नी उलमा काउंसिल के महामंत्री हाजी सलीस, इंटरनेशनल सूफी मिशन माजिद देवबंदी, वर्ल्ड वसीला फोरम के शौकत भारती, दरगाह मकनपुर शरीफ के सज्जादानशीं सैयद नूरुल अराफात जाफरी, खानकाह तूसी के नायब सज्जादानशीं मोईनुद्दीन चिश्ती ने स्वागत किया है। इसके साथ ही वसीम रिजवी से वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की मांग की है।

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