लखनऊ: बीजेपी विधायक ने मोस्ट वांटेड को बचाने के लिए ‘चौकी प्रभारी’ से की मारपीट

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लखनऊ में एक मोस्ट वांटेड गुंडे को पकड़ने के लिए गई पुलिस के साथ बीजेपी विधायक ने मारपीट की। दरअसल लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर से मारपीट करने के मामले में फरार चल रहे आरोपी प्रशांत मिश्रा को पुलिस ने बृहस्पतिवार देर शाम को दबोच लिया। वहीं अटलजी के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में जमा हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने चौकी प्रभारी पर हमला कर आरोपी को छुड़ा लिया।

मारपीट के दौरान आरोपी को पुलिस ने घेरने का प्रयास किया, वह कार्यकर्ताओं के साथ गाड़ी में बैठकर फरार हो गया। बताया जा रहा है कि ये सभी कार्यकर्ता बीकेटी से भाजपा विधायक अविनाश त्रिवेदी के साथ मौके पर मौजूद थे। वहीं विधायक ने प्रशांत मिश्रा और विवाद में शामिल कार्यकर्ताओं का अपने से कोई संबंध नहीं बताया है।

झूलेलाल पार्क में अस्थि कलश के विसर्जन का कार्यक्रम था। इस दौरान चौकी प्रभारी अभय सिंह की ड्यूटी एलयू के मेन गेट पर थी। अस्थि विसर्जन कार्यक्रम खत्म होने के बाद वह यातायात व्यवस्था संभाल रहे थे। इसी बीच उनकी नजर एलयू वीसी व शिक्षकों के साथ पांच जुलाई को हुई मारपीट केआरोपी प्रशांत मिश्रा पर पड़ी।

उन्होंने प्रशांत को दबोचा और उसे चौकी की तरफ  ले जाने लगे। उसी समय भाजपा विधायक अविनाश त्रिवेदी का काफिला गुजरा। इसमें बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्हें देख प्रशांत चीखने लगा। दोनों पक्ष प्रशांत को छोड़ने का दबाव पुलिस पर बनाने की कोशिश करने लगे। अभय सिंह ने अनसुना किया तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने नाराज होकर उन पर पर हमला कर दिया। उनकी पिटाई की गई और वर्दी पर लगी नेम प्लेट को नोंचकर उखाड़ दिया।

कार्यकर्ताओं की भीड़ में अकेले फंसे चौकी प्रभारी की पकड़ कमजोर पड़ी तो प्रशांत मिश्रा उन्हें धक्का देकर वहां से फरार हो गया। मौके पर मौजूद विधायक पुलिस पर हमलाकर रहे समर्थकों को रोकने के बजाए चौकी प्रभारी को धमकाते हुए एसयूवी में चल दिए।

एएसपी ट्रांस गोमती हरेन्द्र कुमार ने बताया कि प्रशांत को हिरासत में लिए जाने पर उसके कुछ साथियों ने विरोध किया था। इस वजह से धक्का-मुक्की हुई।बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के निधन के बाद उनकी कलश यात्रा में शामिल हुए बीजेपी विधायक अविनाश त्रिवेदी का काफिला घर के लिए रवाना हुआ। कार्यक्रम स्थल से कुछ ही दूरी पर जाने पर एलयू चौकी इंचार्ज अभय सिंह ने काफिला रोककर उसमे शामिल प्रशांत मिश्रा को पकड़ने की कोशिश की ।

क्योंकि कुछ दिन पहले LU के मामले में वो नामजद है और फरार चल रहा था। प्रशांत मिश्रा के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया जा चुका है।प्रशांत को पकड़ने की कोशिश में लगी पुलिस के खिलाफ विधायक और उनके कार्यकर्ता उग्र हो गए और मारपीट शुरु कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां पर सीईओ और इंस्पेक्टर हसनगंज मौजूद थे लेकिन बीच बचाव के लिए आगे नहीं आए। विधायक की गुंडागर्दी के सामने वह तमाशबीन बनकर खड़े रहेऔर अब जब मीडिया की वजह से मामले ने तूल पकड़ लिया तो अधिकारी अपनी जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।

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