राखी बांधने का कब हैं शुभ मुहूर्त क्या हैं पूजा विधि और क्या हैं इसका में महत्व जानिए….

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भारत में हिन्दू धरम में अनेकों त्यौहार मनाये जाते हैं जिनके महत्व भी खास हैं|भारत में त्‍योहार सिर्फ खाने-पीने और मौज-मस्ती का नाम नहीं हैं, बल्किद यह एक दूसरे के प्रति प्यार , समर्पण और त्या्ग को भी दर्शाते हैं. ऐसा ही एक त्योहार है रक्षाबंधन जो भाई-बहन के असीम प्या‍र का प्रतीक है.भाई-बहन साल भर इस त्योहार का इंतजार करते हैं. रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र या राखी बांधती हैं. वहीं, भाई अपनी बहनों को सामर्थ्यक के अनुसार भेंट देकर उनकी रक्षा का वचन देते हैं. होली, दीपावली की तरह ही इस त्योहार को देश भर में परंपरा और उत्साह के साथ मनाया जाता है.

हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन का विशेष महत्व है. पुरातन काल से इस पर्व को मनाया जा रहा है. यह हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है. यह ऐसा पर्व है जिसमें संवेदनाएं और भावनाएं कूट-कूट कर भरी हुईं हैं. यह इस पर्व की महिमा ही है जो भाई-बहन को हमेशा-हमेशा के लिए स्‍नेह के धागे से बांध लेती है. रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है. देश के कई हिस्सों में रक्षाबंधन को अलग-अलग तरीके से भी मनाया जाता है. महाराष्ट्रह में सावन पूर्णिमा के दिन जल देवता वरुण की पूजा की जाती है. रक्षाबंधन को सलोनो नाम से भी जाना जाता है.

मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन के दिन अपराह्न यानी कि दोपहर में राखी बांधनी चाहिए. अगर अपराह्न का समय उपलब्ध न हो तो प्रदोष काल में राखी बांधना उचित रहता है. भद्र काल के दौरान राखी बांधना अशुभ माना जाता है. यहां पर हम आपको इस साल राखी बांधने के सही समय के बारे में बता रहे हैं.

राखी बांधने का समय: सुबह 5 बजकर 59 मिनट से शाम 5 बजकर 25 मिनट तक (26 अगस्ता 2018)
अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 4 बजकर 12 मिनट तक (26 अगस्त 2018)
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: दोपहर 03 बजकर 16 मिनट (25 अगस्त2 2018)
पूर्णिमा तिथि समाप्तभ: शाम 05 बजकर 25 मिनट (26 अगस्त 2018)

राखी बांधने की पूजा विधि

रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, संपन्नंता और खुशहाली की कामना करती हैं. वहीं भाई अपनी बहन को कपड़े, गहने, पैसे, तोहफे या कोई भी भेंट देकर उनकी रक्षा का वचन देते हैं. रक्षाबंधन के दिन अपने भाई को इस तरह राखी बांधें:
– सबसे पहले राखी की थाली सजाएं. इस थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीली सरसों के बीज, दीपक और राखी रखें.
– इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें.
– राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें. फिर भाई को मिठाई खिलाएं.
– अगर भाई आपसे बड़ा है तो चरण स्पउर्श कर उसका आशीर्वाद लें.
– अगर बहन बड़ी हो तो भाई को चरण स्पार्श करना चाहिए.
– राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्छार और सामर्थ्यए के अनुसार बहनों को भेंट देना चाहिए.
– ब्राह्मण या पंडित जी भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं.
– ऐसा करते वक्त इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

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