क्यों 13 नंबर को दुनिया मानती है अशुभ, लेकिन वाजपेयी क्यों मानते थे खास क्या है इस की वजह जाने….

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करीब 2 माह से अधिक समय से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का (15 अगस्त) को निधन हो गया है। 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली के एम्स में शाम 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांस ली। पूर्व प्रधानमंत्री की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता को गुर्दे में संक्रमण, मूत्र नली में संक्रमण, पेशाब की मात्रा कम होने और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली (एम्स) में भर्ती कराया गया था।

गुरुवार को एम्स की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में बताया गया कि, ‘‘पूर्व प्रधानमंत्री की हालत वैसी ही बनी हुई है। उनकी हालत नाजुक है और वह जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं।’’ इससे पहले अस्पताल ने बुधवार रात एक बयान में कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश, उनकी हालत बिगड़ गई है। उनकी हालत गंभीर है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है।’’ एक सूत्र ने बताया, ‘‘निमोनिया के कारण उनके दोनों फेफड़े सही से काम नहीं कर रहे थे और दोनों किडनी भी कमजोर हो गई थी। उनकी हालत नाजुक है।’’ वाजपेयी को 2014 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

वाजपेयी को 2014 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वाजपेयी 3 बार प्रधानमंत्री रहे। वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही चल पाई थी। 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीनों तक चली थी। 1999 में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 सालों का कार्यकाल पूरा किया। जहां अटल जी के जीवन में उनके लिए 13 नंबर खास अहमियत रखता था। यह नंबर दुनिया वालों के लिए अनलकी है लेकिन अटल जी के लिए उतना ही लकी। वह इस नंबर को खास मानते थे।

13 मई 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार पीएम पद की शपथ ली थी। लेकिन पूर्ण बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें 13 दिन बाद ही पीएम पद छोड़ना पड़ा। वह 16 मई से 1 जून तक की पीएम की गद्दी पर काबिज रहे थे। दिलचस्प ये है कि 13 महीने बाद ही फिर वह जीतकर सत्ता में आए।  19 मार्च 1998 को फिर पीएम बनकर लौटे और 22 मई 2004 तक रहे थे।

उनके राजनीतिक जीवन में एक और वाक्या ऐसा हुआ जिसका कनेक्शन 13 नंबर से हैं। दरअसल, जब तीसरी बार अटल बिहारी पीएम बनकर लौटे तो उन्होंने 13 दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई। इस बार उन्होंने 13 अक्टूबर 1999 को पद की शपथ ली थी।

तीसरी बार जब अटल जी शपथ लेने के लिए जा रहे थे तब उनके करीबियों ने कहा कि 13 नंबर आपके लिए ठीक नहीं है लेकिन उन्होंने इस सोच को दरकिनार किया और 13 अक्टूबर को ही शपथ ली। किस्मत से तीसरी बार उनकी सरकार पूरे 5 साल चली।  जबकि 2004 के चुनाव में 13 मई की वोटिंग में बीजेपी को सत्ता गंवानी पड़ी थी। इस चुनाव में वाजपेयी ने 13 अप्रैल को नामांकन दाखिल किया था।

अटल बिहारी के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह कई बार होटलों में भी 13 वीं मंजिल या रुम नंबर 13 लेते थे। लोग भले ही 13 नंबर को अशुभ मानते हों लेकिन अटल जी अपने लिए इस नंबर को लकी मानते थे। उनका इस नंबर से मानो कुछ खास कनेक्शन सा बन गया है।अटल जी के जाने से देश के तमाम नेताओं को झटका लगा है। खास तौर से उनके शिष्य पीएम मोदी को। इफ्तार पार्टी में अटल बिहारी| वह मुस्लिमों के बीच काफी लोकप्रिय थे|

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