आखिर क्यों सुनाई कोर्ट ने 4 साल के मंसूर को उम्रकैद की सजा, क्या थी इस की वजह जाने

0
369

यूँ तो आप हर रोज अपराध और अपराधियों से जुड़ी कई घटनाएँ सुनते रहते होंगे लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी 4 साल के बच्चे को उम्र कैद हो सकती है? यक़ीनन आपका जवाब होगा नहीं, लेकिन एक कोर्ट को इस बात पर बिलकुल हैरानी नहीं हुई कि एक 4 साल का बच्चा कैसे कोई इतना बड़ा अपराध कर सकता है कि उसे कोर्ट को उम्र कैद की सजा सुनानी पड़े.

कोर्ट ने 4 साल के मासूम को सुनाई उम्र कैद की सज़ा…
जी हाँ आज हम आपको एक ऐसे बच्चे की कहानी बताएंगे जिसके गुनाह के चलते कोर्ट को उसे महज 4 साल की उम्र में ही उम्र कैद की सज़ा देनी पड़ी. इस बारे में सुनने से ही आपको ताज्जुब हो रहा होगा लेकिन आपको बता दें कि ऐसे ही एक मामले ने दुनिया को उस वक्त भी हैरान किया जब कोर्ट ने यह सज़ा सुनाई थी.

जानिए क्या था पूरा मामला?…
दरअसल यह कहानी है, एक 4 साल के उस मासूम बच्चे मंसूर कुरानी अली की जिसपर महज चार साल की उम्र में ऐसे संगीन अपराधों के इल्जाम लगे जिसे दुनिया की शायद ही कोई और अदालत सच मान सके. इस मामले में ही एक कोर्ट ने न केवल उसे सभी अपराधों के लिए दोषी ठहराया बल्कि उसे 4 साल की उम्र में ही उम्र कैद की सजा भी सुना डाली.

आप सोच रहे होंगे कि भला इतनी कठोर कौन सी अदालत हो सकती है. आपको बता दें कि यह मामला मिस्र का हैं जहाँ एक कोर्ट ने 4 साल के बच्चे को 4 लोगों की हत्या करने और 8 लोगों को जान से मारने की कोशिश करने व पुलिस को धमकाने के जुर्म में उम्र.कैद की सजा सुनाई है.

4 साल के मासूम पर ये है आरोप…
जब कोर्ट ने सज़ा सुनाई तो मामले ने तूल पकड़ा और देश ही नहीं दुनियाभर के लोग कोर्ट के इस फैसले का पुरजोर विरोध करने लगे. लोगों ने सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक कोर्ट के फैसले को कड़ी चुनौती दी. इतना ही नहीं इस मामले पर तमाम बड़े एक्सपर्ट ने भी अपनी राय पेश की.

लेकिन बावजूद इसके अदालत एक साल तक फैसले से टस से मस नहीं हुई. जब यह मुद्दा देखते ही देखते विश्वव्यापी स्तर पर भी उठने लगा और मिस्र के कानून की निंदा शुरू हुई तो तब कही जाकर कोर्ट ने अपने इस फैसले पर दुबारा जांच के आदेश दिए.

दुबारा जांच में बच्चा निकला निर्दोष…
दुबारा जांच में इस मामले में मानो एक नया ही मोड़ आ गया. दरअसल जिन अपराधों के लिए मंसूर नामक इस बालक को 1 साल तक सलाखों के पीछे अपराधियों की तरह रखा गया था दुबारा जांच में मालूम चला कि वह अपराध असल में उसने किए ही नहीं थे. जांच में ये बात भी सामने आई कि कोर्ट ने बिना जांच किये ही मासूम को अपराधी करार दे दिया था.

जिसमें मंसूर को मिस्र की कोर्ट ने 2014 के दंगो में भाग लेने के लिए 115 अन्य आरोपियों के साथ दोषी पाया था. कोर्ट की सज़ा के चलते मासूम को एक साल तक सजा जेल में ही काटनी पड़ी. क्योंकि जिस मामले के लिए मंसूर को सजा सुनाई गई थी.उसके लिए पुलिस ने 114 लोगों को आरोपी मानकर गिरफ्तार किया.और बच्चे की सजा को माफ किया गया लेकिन बाद में जब मासूम निर्दोष साबित हुआ तो कोर्ट ने उसके पिता से अपने ग़लत फैसलें के लिए मांफी भी मांगी.

कानून अंधा होता है…
वाकई किसी ने सच ही कहा है कि कानून अंधा होता है, इसका ही एक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला जब बिना जाने-सुने एक मासूम को कोर्ट ने एक साल तक जेल में रखा.

एक कोर्ट जिसे न्याय के लिए जाना जाता हैं उससे इतनी बड़ी गलती हो सकती है यकीन नहीं होता, मगर सच्चाई तो यही है कि न्याय के मंदिर में इस मासूम के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here