अकबर मोब लिंचिंग: मारने वाले बोले- हमारे साथ विधायक हैं, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जला दो इसे

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अलवर। राजस्थान के अलवर में गो तस्करी के शक में अकबर खान उर्फ रकबर की हुई हत्या की गुत्थी अब भी अनसुलझी है. इस बीच भीड़ को चकमा देकर भागे अकबर के दोस्त असलम ने चौंकाने वाला दावा किया है. असलम के मुताबिक, कथित गो-रक्षकों की भीड़ जब उनपर हमला करने आई तो भीड़ ने कहा, ”विधायक हमारे साथ हैं. कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. उसे (अकबर, असलम) जला दो.” असलम ने पुलिस को दिये गये बयान में यह दावा किया है.

अलवर मॉब लिंचिंग मामले में अब 4 पुलिसवालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है और जांच भी ज़िला पुलिस के हाथ से ले ली गई है. इस बीच रकबर की आखिरी फोटो सामने आई है, जिसमें वो पुलिस की गाड़ी में भी ज़िंदा था. वहीं अलवर की मॉब लिंचिंग ने फिर देश की राजनीति में तूफ़ान पैदा कर दिया है. कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. इस बीच सरकार ने भीड़ की हिंसा को लेकर एक हाई-लेवेल कमेटी बनी दी है. इसकी सिफारिशों पर एक GoM विचार करेगा.

ये रकबर की शायद आखिरी तस्वीरें हैं और ये तस्वीरें वीएचपी के नवल किशोर ने लीं जब रकबर को पुलिस बचा कर ला रही थी. रकबर की ये आखिरी फोटो पुलिस की गाड़ी में ली गई है और सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि पुलिस 3.47 तक उसे सड़क पर घुमा रही थी. इस मामले में अब 4 पुलिसवालों पर कार्रवाई की है. रकबर के भाई का कहना है कि उसके भाई की पिटाई हुई है. वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी कहती है कि रकबर की मौत पिटाई के चलते अंदरूनी ख़ून बहने से मौत हुई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि असलम ने भीड़ के हमले के वक्त धर्मेंद्र, परमजीत, नरेश, सुरेश और विजय का नाम सुना था. जो पूरे मामले में आरोपी है. इन आरोपियों में से तीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और दो की तलाश जारी है.

आपको बता दें कि अलवर की घटना सुर्खियों में आने के बाद बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने आरोपियों का बचाव करते हुए दावा किया था कि अकबर खान की मौत भीड़ के हमले में नहीं, पुलिस की पिटाई में हुई है. उन्होंने न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा था कि जांच के बाद सबकुछ साफ हो जाएगा.

आपको बता दें कि अकबर खान अपने दोस्त असलम के साथ के साथ पशुओं को ले जा रहा था, तभी अलवर में लालावंडी गांव के समीप ग्रामीणों के एक समूह ने उसे रोक लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई की. रामगढ़, जयपुर रेंज के अतिरिक्त महानिदेशक ने बताया था की सूचना आधी रात के बाद 12.40 बजे मिली थी. घायल अकबर खान ने अधिकारियों को बताया कि वह अपने साथी असलम के साथ लाडपुर से गायों को खरीद कर लाया था और वे अपने गांव जा रहे थे, तभी उन लोगों ने उन्हें गो तस्कर समझ लिया और उनपर हमला कर दिया. असलम किसी तरह से जान बचाकर भाग गया.

आपको बता दें कि इस पूरे मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है. चश्मदीदों का दावा है कि अगर पुलिस संदवेदनशीलता दिखाती तो अकबर खान की जान बच सकती थी. दावा यह भी किया जा रहा है कि भीड़ ने अकबर खान की हल्की पिटाई की थी और पुलिस के हवाले कर दिया था. लेकिन बाद में पुलिस ने भी अकबर की पिटाई की और उसे अस्पताल ले जाने के बजाय थाने लेकर गई. पुलिस तीन घंटे के देरी से अकबर को अस्पताल लेकर आई, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. पुलिस ने लापरवाही की बात कबूल की है. इस मामले में राजस्थान ने चार पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया है और तीन को लाइन हाजिर किया है.

एनडीटीवी इंडिया के अनुसार उसे एक पर्चानामा मिला है जो रकबर के साथी असलम ने पुलिस को लिखवाया है. असलम का कहना है कि पांच आदमी मिले थे जो आपस में नाम ले रहे थे. सुरेश, विजय, परमजीत, नरेश, धर्मेंद्र कहकर पुकार रहे थे. मुझे पकड़ लिया और रकबर को खेत में गिरा दिया. रकबर के साथ खेत में लाठी-डंडे से मारपीट शुरू की. वो लोग कह रहे थे हमारे साथ एमएलए साहब हैं और हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. इसमें आग लगा दो.

हालांकि यह पर्चानामा कोर्ट में सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता है फिर असलम ने मीडिया के सामने दिए अपने बयान में ये सब नहीं कहा था. लेकिन इस बयान की जांच से पुलिस को कुछ सुराग मिल सकते हैं. एक दिन पहले ही एनडीटीवी की जांच के दौरान कुछ लोगों ने ये आरोप लगाया कि रकबर को भीड़ के बाद पुलिस ने भी मारा है. ये आरोप सही है या नहीं- यह बात पुलिस की जांच से ही मालूम होगा. लेकिन ये साफ़ है कि रकबर की मॉब लिंचिंग को संजीदगी से लेने की जगह अब तक पुलिस ने जो रवैया दिखाया है वो अपने आप में किसी जुर्म से कम नहीं.

राजस्थान के अलवर में गौतस्करी के शक में अकबर खान उर्फ रकबर को किसने मारा?  

यह बड़ा सवाल बना हुआ है. पूरी वारदात के दौरान मौजूद रहे लोगों का दावा है कि पुलिस की पिटाई में अकबर की मौत हुई. वहीं पुलिस ने लापरवाही की बात तो स्वीकार की है लेकिन उसका दावा है कि भीड़ ने ही गो तस्कर होने के शक में अकबर की पिटाई हुई और बाद में उसकी मौत हो गई. इस बीच अकबर का एक फोटो सामने आया है जिसमें वह पुलिस कस्टडी में है और वह बिल्कुल स्वस्थ दिख रहा है.

चश्मदीदों का दावा है कि अकबर की पुलिस पिटाई में मौत हुई है. कथित गोरक्षकों ने जब करीब 12:30 बजे रात को अकबर को पकड़ा था तो हल्की मारपीट के बाद पुलिस को सूचना दी थी. पुलिस के हिरासत में जाने के बाद अकबर की मौत हुई है. पुलिस पर आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद उसकी पिटाई की गई. राजस्थान पुलिस ने हिरासत में अकबर को लेने के बाद बरती गई लापरवाही की बात मानी है. इस मामले में चार अफसर को निलंबित कर दिया गया है और तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है.

पुलिस पर आरोप है कि उसने करीब एक बजे अकबर को हिरासत में लेने के बाद मात्र चार किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचने में तीन घंटे लगाए. यानि पुलिस करीब चार बजे अस्पताल पहुंची. तब तक अकबर की मौत हो चुकी थी. यह भी दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने घायल अकबर को अस्पताल ले जाने की बजाय थाने लेकर गई. थाने ले जाने से पहले धूल से सने अकबर का शरीर साफ किया गया. पुलिस ने थाना से अस्पताल ले जाते समय संवेदनशीलता को ताक पर रखकर चाय भी पी. एबीपी न्यूज ने जब उस चाय वाले से बात की तो उन्होंने कहा कि मैंने रात करीब 1 बजे दुकान खोली थी और चार पुलिसकर्मी मेरी दुकान पर आए और मुझसे चाय मांगी लेकिन समय मुझे याद नहीं है कि कितने बजे आए होंगे.

पुलिस महानिदेशक ओपी गल्होत्रा ने कहा कि टीम यह जांच करेगी कि शनिवार को पीटे जाने के बाद रकबर उर्फ अकबर को सिर्फ चार किलोमीटर दूर अस्पताल तक ले जाने में इतना समय कैसे लगा. गठित टीम में वरिष्ठ अधिकारी एन.आर.के. रेड्डी, पी.के. सिंह, हेमंत प्रियदर्शी और महेंद्र सिंह चौधरी शामिल हैं. रामगढ़ में विश्व हिंदू परिषद की गौरक्षक इकाई के प्रमुख नवल शर्मा के अनुसार, दर्ज मामले में कहा गया है कि पुलिस घटनास्थल पर रात 12.41 बजे पहुंची और वे पीड़ित को रात एक बजे ले गए.

इसके बाद पुलिस आश्चर्यजनक रूप से तड़के चार बजे अस्पताल पहुंचती है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित की मौत तड़के 3.40 बजे हो चुकी थी. इस पूरे मामले में चार नामजद आरोपी हैं. जिसमें से तीन को गिरफ्तार किया गया है और एक की तलाश जारी है.

क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार ने बताया कि दो शख्स अकबर और असलम रात में खेतों से होकर गाय ले जा रहे थे. जब ये मवेशी चिल्लाने लगे, तो कुछ गांव वालों ने बाहर आकर अकबर को पीटना शुरू किया. तेज बारिश होने के कारण अकबर कीचड़ में गिर गया और उसका साथी असलम भाग निकला. तबतक पुलिस घटना स्थल पर पहुंच गई.

हालांकि पीड़ित के कीचड़ से सने होने के कारण पुलिस ने उसे अपनी गाड़ी से ले जाने से इंकार कर दिया और गांव वालों को उसे साफ करने को कहा. गांववालों ने उस पर पानी डाला. धर्मेद्र नामक व्यक्ति अपने घर से कपड़े लाया. पुलिस ने बाद में धर्मेद्र को आरोपी के तौर पर हिरासत में ले लिया. विजय कुमार का कहना है कि पुलिस वाले नशे में थे और पीड़ित के पहले भी गौ तस्करी में शामिल रहने के कारण पुलिस ने भी शायद उसे पीटा हो.

उनके अनुसार, जब अकबर की मौत हुई तो पुलिसवाले खुद को बचाने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों को गिरफ्तार करने गांव आए. इस बीच गाय को तड़के 3.26 बजे एक तीन-पहिया वाहन से गौशाला ले जाया गया. अलवर के पुलिस अधीक्षक राजेंद्र सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ”हम मामले की जांच कर रहे हैं और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.”

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