अमीर उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुंचाने के चक्कर में मोदी सरकार ने डुबा दिए देश के 20000 करोड़ रूपये, जनता के साथ गद्दारी

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हमेशा से ही मोदी सरकार पर उद्योगपतियों और अमीरों को फ़ायदा पहुंचाने का आरोप लगता रहा है. भले ही पीएम मोदी खुद को गरीबो की सरकार बताते रहे हो लेकिन उनके द्वारा बनाए जा रहे कानूनों को देख कर हर मायनों में वो महज अमीरों की सरकार बनकर ही रह गई है.
1. उद्योगपति को फ़ायदा पहुंचाने के लिए मोदी ने की देश से ग़द्दारी

विशेष लोगों को अपनी सरकार द्वारा फ़ायदा पहुंचाने को लेकर मोदी पहले ही बदनाम थे, ऐसे में अब मोदी सरकार ने अपने बेहद करीबी माने जा रहे उद्योगपति गौतम अडानी को फायदा पहुँचाने के लिए देश के शिपिंग कानूनों में बदलाव कर एक बार फिर इसका सबूत दे दिया है.

केंद्र द्वारा कानून में किये जा रहे बदलाव से जहाँ अडानी को हज़ारों करोड़ का फायदा होगा तो वहीं देश के लाखों आम नागरिक बेरोजगार भी होंगे. जी हाँ ऐसा हम नहीं बल्कि इस मामले पर वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार परनजॉय गुहा ठाकुरता ये दावा कर रहे है.
2. देश की जनता का काम केंद्र ने दिया विदेशियों को

पत्रकार परनजॉय की माने तो उन्होंने अध्यन किया हैं कि जब भी दूसरे देश से कोई जहाज़ वस्तुएं लेकर आता है तो हर राज्य के पोर्ट पर सामान पहुँचाना उनके लिए मुमकिन नहीं होता, इसीलिए भारतीय कंपनियों के कई छोटे-छोटे जहाज़ देशभर में ये काम करते हैं.

ऐसे में अब जब मोदी सरकार ने भारत के आंतरिक शिपिंग व्यवसाय में विदेशी कंपनियों को आने का खुला मौका दे दिया है, तो इसका सीधा असर छोटे-छोटे जहाज कारोबारियों पर ही पड़ेगा.

3. देश को होगा अरबों का नुकसान 

मोदी सरकार द्वारा ये फ़ैसला इसी वर्ष 21 मई को लिया गया. जिसका सीधा-सीधा दोहरा फायदा उद्योगपती गौतम अडानी को ही होगा, क्योंकि इस क्षेत्र में जो विदेशी कम्पनियाँ भारत में आ रही हैं उनमें से कई के साथ अडानी समूह की पार्टनरशिप है.

विशेषज्ञों की माने तो मोदी सरकार के इस फैसले से दूसरा फायदा ये होगा कि अब सामान सरकारी बंदरगाह से ज़्यादा निजी बंदरगाह पर उतरेगा, और ये बंदरगाह भी होगी अडानी ग्रुप की मुंद्रा बंदरगाह.

4. आज़ादी के बाद पहली बार बदला गया कानून

इस फैसले से पहले की बात करे तो अब तक विदेशी कम्पनियाँ भारत के आंतरिक बंदरगाहों में सामान लेकर नहीं जा सकती थी. ये अधिकार केवल भारतीय कंपनियों के पास ही था. किसी भी छोटो-बड़ी विदेशी कंपनी को एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह सामान पहुँचाने की इजाज़त तब ही मिलती थी जब उसके लिए कोई भारतीय कंपनी का जहाज़ मौजूद ना हो.

ऐसा करने के लिए भी विदेशी कम्पनियाँ को पहले डायरेक्टर जनरल ऑफ़ शिपिंग और इंडियन नेशनल शिप ओनर्स एसोसिएशन की अनुमती लेनी पड़ती थी. विदेशी कंपनियों के लिए इस तरह के सख्त नियम इसलिए बनाए गए थे ताकि देश के सैकड़ों लोगों को व्यवसाय करने का मौका मिल सके.

लेकिन अब आजादी के बाद पहली बार मोदी सरकार ने इन ख़ास नियमों को महज कुछ लोगों को फ़ायदा पहुचाने के चलते बदलते हुए देश से गद्दारी की है.

निष्कर्ष

मोदी सरकार के इस नियम बदलाव के बाद अब सवाल ये उठ रहा हैं कि आखिर क्यों भला मोदी सरकार भारतीय कंपनियों की जगह विदेशी कंपनियों को ज़्यादा काम दिए जाने के हक़ में है? मोदी सरकार शायद भूल रही हैं कि उसके इस फैसले से जनता के साथ साथ देश के राजस्व का भी नुकसान होगा, क्योंकि इस व्यवसाय में लगभग 30,000 छोटे जहाज़ हैं जो ये काम करते थे. इनमें काम करने वालों की संख्या लगभग एक लाख है. ऐसे में विदेशी कंपनियों के आने के बाद इन सब का रोजगार भी खतरे में पड़ सकता है.

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