Niti Ayog ने की मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा, अपनी विफलताओं को UPA सरकार पर थोप रही है

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नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने भी अक्सर मौजूदा सरकार को विरासत में मिली समस्याएं और उससे प्रभावित सरकार के प्रदर्शन का जिक्र किया है. कुमार ने कहा, ‘जिस सरकार को काफी खराब आर्थिक हालात विरासत में मिली जहां शासन-व्यवस्था और फैसले लेने की क्षमता पूरी तरह पंगु हो चुकी थी और वैश्विक आर्थिक हालात भी अच्छे नहीं थे, वह अब उससे उबर चुकी है. मेरा मानना है कि इस सरकार ने बहुत अच्छा (प्रदर्शन) किया है.’

उन्होंने कहा कि जब भाजपा ने 2014 में सत्ता संभाली थी तो महंगाई दर नौ फीसदी के स्तर को पार कर गई थी और विकास दर घटकर छह फीसदी से नीचे आ गई थी. कुमार ने कहा, ‘(पूर्व वित्तमंत्री पी.) चिदंबरम के समय में एक बार राजकोषीय घाटा 2.8 फीसदी से बढ़ाकर 6.4 फीसदी तक हो गया. उस स्तर से उबरकर हमने पिछले साल 6.7 फीसदी की विकास दर हासिल की, जबकि वित्तवर्ष की अंतिम तिमाही में विकास दर 7.7 फीसदी रही. महंगाई दर घटकर पिछली तिमाही में 3.8 फीसदी पर आ गई. मेरा मानना है कि यह उल्लेखनीय है.’

वित्तवर्ष 2017-18 में राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी रहा और सरकार ने चालू वित्तवर्ष में इसे 3.3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है. हालांकि कुमार ने माना कि निर्यात क्षेत्र का प्रदर्शन चिंता का सबब है और पानी का भी संकट पैदा होने जा रहा है. उन्होंने कहा कि पानी संकट और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है.

राजीव कुमार ने कहा, ‘ये गंभीर समस्याएं हैं. इसे सुलझाने में वक्त लगेगा. लेकिन सरकार को श्रेय दिया जाना चाहिए कि उन्होंने इन समस्याओं को संज्ञान में लिया है न कि उससे मुंह मोड़ा है. साथ ही सरकार इसको लेकर नया तरीका अपनाने जा रही है, मसलन, शिक्षा की गुणवत्ता, जल संरक्षण, स्वास्थ्य को लेकर राज्यों के प्रदर्शन की रैंकिंग करने की व्यवस्था की जा रही है.’

कुमार के मुताबिक़ निर्यात क्षत्र में जो प्रदर्शन हमारा रहा है वो चिंता की बात है और अब पानी का भी संकट पैदा होने जा रहा है. उन्होंने कहा कि पानी का संकट और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की ज़रुरत है. भाजपा नेतृत्व वाली सरकार को अब ठीक से काम करने की ज़रुरत है, आरोप लगा कर चुनाव तो जीते जा सकते हैं लेकिन चुनाव जीतने के चक्कर में देश की अर्थव्यवस्था कहीं पटरी से ना खिसक जाए.

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