कैराना जीत के तबस्सुम हसन देगी इफ़्तार पार्टी, अखिलेश और मायावती कोर्ट भेजा गया निमंत्रण

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बीजेपी को कैराना और नूरपुर उपचुनाव में हराने के बाद आरएलडी और समाजवादी पार्टी एक बार फिर साथ में नजर आएंगे। मौका होगा इफ्तार पार्टी का। इफ्तार पार्टी का आयोजन बुधवार को आरएलडी के पार्टी ऑफिस में होगा, जो एक तरह से कैराना से आरएलडी के टिकट पर सांसद बनीं तबस्सुम हसन की जीत का जश्न भी होगा।

आरएलडी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने इस इफ्तार पार्टी का न्योता एसपी चीफ अखिलेश यादव, बीएसपी अध्यक्ष मायावती और यूपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर को भेजा है। हालांकि इस पार्टी में मायावती का आना मुश्किल होगा, जबकि अखिलेश और राज बब्बर के पहुंचने की उम्मीद है।

यह शायद ऐसा पहला मौका होगा जब यूपी के प्रमुख क्षेत्रीय दल इस तरह इफ्तार पार्टी के बहाने एकजुट होंगे। कांग्रेस ने भी हाल ही में एक इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था, जबकि समाजवादी पार्टी जल्द ही इफ्तार पार्टी दे सकती है।

आरएलडी प्रवक्ता अनिल दुबे ने TOI से बताया, ‘यह एक और मौका है जब एक जैसी विचारधारा वाले दल एकजुट होंगे।’ उन्होंने कहा कि यह एक मौका होगा, जहां हम अपनी जीत का जश्न मनाएंगे। एसपी और आरएलडी ने हाल ही में सम्पन्न हुए कैराना और नूरपुर उपचुनाव में बीजेपी को हराने के लिए हाथ मिलाया था।

बता दें कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो रहा है. ऐसे में यूपी में सपा, बसपा कांग्रेस सहित RLD एक साथ मिलकर 2019 में उतर सकते हैं. कैराना उपचुनाव में RLD उम्मीदवार तबस्सुम हसन के समर्थन में विपक्षी दलों ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे. इसका नतीजा था कि तबस्सुम ने भाजपा उम्मीदवार मृगांका सिंह को करीब 42 हजार मतों से मात दी है.

RLD को मिली जीत से पार्टी प्रमुख चौधरी अजित सिंह का कद बढ़ गया है. 2019 में मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा बनाए जा रहे महागठबंधन में RLD भी अब अहम हिस्सा हो सकती है. RLD की संजीवनी मिल गई है.

गौरतलब है कि नवंबर 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और मुस्लिम समुदाय के बीच खाई गहरी हो गई थी. RLD की राजनीति के सितारे डूबने लगे थे. RLD के सामने सबसे बड़ी चुनौती जाट वोट को वापस अपने पाले में लाने की थी, जो 2014 के लोकसभा चुनाव और बाद में 2017 के विधानसभा चुनाव में उससे छिटककर भाजपा के खेमे में चला गया था.

इसी का नतीजा था कि लोकसभा चुनाव में खुद अजित सिंह हार गए और पार्टी एक सीट भी नहीं जीत सकी. जबकि विधानसभा चुनाव में एक ही विधायक जीत सका था, जो बाद में भाजपा में चला गया. लेकिन अब विपक्षी एकता बनने के बाद से अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी इस जाट और मुस्लिम गठजोड़ को कैराना लोकसभा उपचुनाव के जरिए फिर से कायम करने में सफल रहे हैं.

RLD उम्मीदवार तबस्सुम हसन के बहाने चौधरी अजित सिंह ने अपना खोया हुआ जनाधार वापस पा लिया है. 2019 तक वे जाट और मुस्लिम समुदाय को पार्टी से जोड़े रखने में हर संभव कोशिश में जुटे हैं. इसी कड़ी में रोज इफ्तार पार्टी का आयोजन हो रहा है.

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